टूट रही जब मर्यादा हो , सब सोचें बस काम बने । युग के गौरव की खातिर अब , कोई तो श्री राम बने ।। आज आचरण की गरिमा से , सकल विश्व महकाना है । सम्मानित आराध्य तभी हों , जन्मभूमि जब धाम बने ।।