Wednesday, 5 April 2017

रामनवमी के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

टूट रही जब मर्यादा हो ,
सब सोचें बस काम बने ।
युग के गौरव की खातिर अब ,
कोई तो श्री राम बने ।।
आज आचरण की गरिमा से ,
सकल विश्व महकाना है ।
सम्मानित आराध्य तभी हों ,
जन्मभूमि जब धाम बने ।।

Wednesday, 29 March 2017

चाणक्य के 15 अमर वाक्य

1)दुनिया की सबसे बड़ी ताकत पुरुष का विवेक
और महिला की सुन्दरता है।

2)हर मित्रता के पीछे कोई स्वार्थ जरूर होता है, यह
कड़वा सच है।

3)अपने बच्चों को पहले पांच साल तक खूब प्यार करो।
छः साल से पंद्रह साल तक कठोर अनुशासन और संस्कार
दो।
सोलह साल से उनके साथ मित्रवत व्यवहार करो।
आपकी संतति ही आपकी सबसे अच्छी मित्र है।"

4)दूसरों की गलतियों से सीखो
अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने को तुम्हारी आयु कम
पड़ेगी।

5)किसी भी व्यक्ति को बहुत ईमानदार नहीं होना
चाहिए।
सीधे वृक्ष और व्यक्ति पहले काटे जाते हैं।

6)अगर कोई सर्प जहरीला नहीं है
तब भी उसे जहरीला दिखना चाहिए वैसे दंश भले ही न
हो
पर दंश दे सकने की क्षमता का दूसरों को अहसास
करवाते रहना चाहिए।

7)कोई भी काम शुरू करने के पहले तीन सवाल अपने आपसे
पूछो...
मैं ऐसा क्यों करने जा रहा हूँ ?
इसका क्या परिणाम होगा ?
क्या मैं सफल रहूँगा?

8)भय को नजदीक न आने दो अगर यह नजदीक आये
इस पर हमला कर दो यानी भय से भागो मत
इसका सामना करो।

9)काम का निष्पादन करो, परिणाम से मत डरो।

10)सुगंध का प्रसार हवा के रुख का मोहताज़ होता है
पर अच्छाई सभी दिशाओं में फैलती है।"

11)ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है
अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ।

12)व्यक्ति अपने आचरण से महान होता है
जन्म से नहीं।

13)ऐसे व्यक्ति जो आपके स्तर से ऊपर या नीचे के हैं
उन्हें दोस्त न बनाओ,
वह तुम्हारे कष्ट का कारण बनेगे।
समान स्तर के मित्र ही सुखदायक होते हैं।

14)अज्ञानी के लिए किताबें और
अंधे के लिए दर्पण एक समान उपयोगी है।

15)शिक्षा सबसे अच्छी मित्र है।
शिक्षित व्यक्ति सदैव सम्मान पाता है।
शिक्षा की शक्ति के आगे युवा शक्ति और सौंदर्य
दोनों ही कमजोर है|

Tuesday, 28 March 2017

भारतीय नव वर्ष की शुभकामनाएं

लिए बहारें आँचल में , जब चैत्र प्रतिपदा आएगी ।
फूलों का श्रृंगार करके , धरती दुल्हन बन जाएगी ।।

मौसम बड़ा सुहाना होगा , दिल सबके खिल जाएँगे ।
झूमेंगी फसलें खेतों में , हम गीत खुशी के गाएँगे ।।

उठो स्वयं को पहचानो , यूँ कबतक सोते रहोगे तुम ।
चिन्ह गुलामी के कंधों पर , कबतक ढोते रहोगे तुम ।।

अपनी समृद्ध परंपराओं का , आओ मिलकर मान बढ़ाएंगे ।
आर्यवृत के वासी हैं हम , अब अपना नववर्ष मनाएंगे॥

Monday, 27 March 2017

सेकुलरिज्म के विषय में मेरे विचार

¤ मैं इस्लाम का उतना ही सम्मान करता हूँ
जितना मुस्लिम हिन्दू धर्म का करते हैँ।

¤ मैं अल्लाह का उतना ही आदर करता हूँ
जितना मुस्लिम प्रभु श्री राम का करते हैँ।

¤ मैं कुरान को उतनी ही इज्जत देता हूँ
जितना मुस्लिम रामायण और गीता को देते हैँ।

¤ मैं मोहम्मद साहब का उतना ही आदर
करता हूँ जितना मुस्लिम श्री शिव जी का करते हैँ।

¤ मैं मस्जिद को उतना ही पवित्र मानता हूँ
जितना मुस्लिम मन्दिर को मानते हैँ।

¤ मैं उनकी माँ बहनों का उतना ही आदर
करता हूँ जितना वो हमारी माँ बहनो का करते हैँ।

¤ मैं उनके त्योहारों का उतना ही आदर करता हूँ जितना वो हमारे त्योहारों का करते हैँ।।

अब आप सब ही बताइये कि मैं
साम्प्रदायिक कैसे हुआ ?

मेरी नजर में,  मैं तो"धर्मनिरपेक्ष"हूँ।।

Sunday, 26 March 2017

गौरैया की प्रतीक्षा

बड़े सुहाने लगते थे वो दिन,
जब प्यारी चिड़िया तिनके बिन बिन|
आती थी इक नीड बनाने,
फिर से हम सबके दिल में बस जाने|

अब ना जाने कब वो आयेगी,
मुझे फिर बचपन में ले जाएगी|
फिर ची ची कर मुझे सताएगी,
फिर से मेरे मन में बस जायेगी|

एक प्यारी चिड़िया थी वो,
एक प्यारी गुड़िया थी वो,
बहुत सारी मौज मस्ती की,
एक छोटी सी पुड़िया थी वो|

कहाँ गई हो प्यारी तुम,
तुमको दिल ये ढूढ़ रहा है|
लौट आओ ओ दुलारी तुम,
इंतज़ार में ये दिल टूट रहा है|

तुम इक चिड़िया नही हमारे दिलों की रानी हो,
इक कवि की रचना इक कवि की कहानी हो|
तुम मेरे बचपन की हर याद में बसी हो,
तुम मेरे जीवन की इक प्यारी सी कहानी हो|

Monday, 30 January 2017

उत्तर प्रदेश चुनाव

भेड़ों से नेताजी ने वादा किया कि वे हर भेड़ को एक-एक कम्बल देने जा रहे हैं।
भेड़ों का झुण्ड ख़ुशी से झूम उठा । उनकी हर्ष ध्वनि से आकाश में चहुंओर मिमियाहट गूंजने लगी।
फिर एक मेमने ने धीरे से अपनी माँ से पूछ लिया : ये नेताजी हमारे कम्बलों के लिए ऊन कहाँ से लाने वाले हैं ?
फिर वहां सन्नाटा था ।।
काश कि ये सवाल लोग राजनीतिक दलों से पूछते कि फ्री चीनी, दूध, घी,मोबाइल फोन, साईकिल , लेपटॉप आदि कहाँ से ला कर देगें ? इन फ्री की मालों का कर्ज किसके ऊपर गीरेगा ?
कांग्रेस और सपा बसपा जैसी पार्टियों ने बरसों से इस फ्री की चक्कर में देश को
डूबोया है.. और फिर जनता को इस गंदी बीमारी का शिकार बनाया है...

संजय लीला भंसाली पद्मावती सूटिंग

भंसाली प्रकरण में बॉलीवुड इकठ्ठा होकर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात कर रहा है। विचारणीय बात है कि क्या व्यावसायिक फायदे के लिए ऐतिहासिक प्रकरणों का विद्रूप बनाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता भी है।
और दूसरी बात, किसी को गुस्सा आया और उसने अपने गुस्से को 'चांटा रसीद कर' अभिव्यक्त किया, तो इस प्रकार की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा क्या नहीं होनी चाहिए?
संस्कृति और इतिहास का विद्रूप बनाना तो सारे देश के गाल पर चांटा है। और शारीरिक चाँटे का असर तो ऐसे चाँटे से कहीं कम है।

मेरे ख्याल से अगर कोई हिंसात्मक तरीके से भी अपनी भावना की अभिव्यक्ति करता है तो उसकी आलोचना का अधिकार किसी को नहीं है। बहुत हुआ तो कानून उसको ऐसे कृत्य के लिए निर्धारित सजा भर दे सकता है।

आशा है देश के गाल पर चाँटे रोकने के लिए कानून के अंतर्गत सजा भुगतने को तैयार युवा सामने आएंगे और संजय लीला भंसाली और अनुराग कश्यप जैसों को चाँटे लगाते रहेंगे।