भेड़ों से नेताजी ने वादा किया कि वे हर भेड़ को एक-एक कम्बल देने जा रहे हैं।
भेड़ों का झुण्ड ख़ुशी से झूम उठा । उनकी हर्ष ध्वनि से आकाश में चहुंओर मिमियाहट गूंजने लगी।
फिर एक मेमने ने धीरे से अपनी माँ से पूछ लिया : ये नेताजी हमारे कम्बलों के लिए ऊन कहाँ से लाने वाले हैं ?
फिर वहां सन्नाटा था ।।
काश कि ये सवाल लोग राजनीतिक दलों से पूछते कि फ्री चीनी, दूध, घी,मोबाइल फोन, साईकिल , लेपटॉप आदि कहाँ से ला कर देगें ? इन फ्री की मालों का कर्ज किसके ऊपर गीरेगा ?
कांग्रेस और सपा बसपा जैसी पार्टियों ने बरसों से इस फ्री की चक्कर में देश को
डूबोया है.. और फिर जनता को इस गंदी बीमारी का शिकार बनाया है...
भेड़ों का झुण्ड ख़ुशी से झूम उठा । उनकी हर्ष ध्वनि से आकाश में चहुंओर मिमियाहट गूंजने लगी।
फिर एक मेमने ने धीरे से अपनी माँ से पूछ लिया : ये नेताजी हमारे कम्बलों के लिए ऊन कहाँ से लाने वाले हैं ?
फिर वहां सन्नाटा था ।।
काश कि ये सवाल लोग राजनीतिक दलों से पूछते कि फ्री चीनी, दूध, घी,मोबाइल फोन, साईकिल , लेपटॉप आदि कहाँ से ला कर देगें ? इन फ्री की मालों का कर्ज किसके ऊपर गीरेगा ?
कांग्रेस और सपा बसपा जैसी पार्टियों ने बरसों से इस फ्री की चक्कर में देश को
डूबोया है.. और फिर जनता को इस गंदी बीमारी का शिकार बनाया है...