Sunday, 26 March 2017

गौरैया की प्रतीक्षा

बड़े सुहाने लगते थे वो दिन,
जब प्यारी चिड़िया तिनके बिन बिन|
आती थी इक नीड बनाने,
फिर से हम सबके दिल में बस जाने|

अब ना जाने कब वो आयेगी,
मुझे फिर बचपन में ले जाएगी|
फिर ची ची कर मुझे सताएगी,
फिर से मेरे मन में बस जायेगी|

एक प्यारी चिड़िया थी वो,
एक प्यारी गुड़िया थी वो,
बहुत सारी मौज मस्ती की,
एक छोटी सी पुड़िया थी वो|

कहाँ गई हो प्यारी तुम,
तुमको दिल ये ढूढ़ रहा है|
लौट आओ ओ दुलारी तुम,
इंतज़ार में ये दिल टूट रहा है|

तुम इक चिड़िया नही हमारे दिलों की रानी हो,
इक कवि की रचना इक कवि की कहानी हो|
तुम मेरे बचपन की हर याद में बसी हो,
तुम मेरे जीवन की इक प्यारी सी कहानी हो|

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