अच्छा दिखने के लिये मत जिओ बल्कि अच्छा बनने के लिए जिओ!!
जो झुक सकता है वह सारी दुनिया को झुका सकता है!!
गंगा में डुबकी लगाकर तीर्थ किये हजार,
इनसे क्या होगा अगर बदले नहीं विचार!!
क्रोध हवा का वह झोंका है जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है!!
अगर बुरी आदत समय पर न बदली जाये तो बुरी आदत समय बदल देती है!!
हमेशा प्रेम की भाषा बोलिए,
इसे बहरे भी सुन सकते हैं और गुंगे भी समझ सकते हैं!!
चलते रहने से ही सफलता है,
रुका हुआ तो पानी भी बेकार हो जाता है..!!
झूठे दिलासे से स्पष्ट इंकार बेहतर है….
खुद की भुल स्वीकारने में कभी संकोच मत करो!!
अच्छी सोच, अच्छी भावना, अच्छा विचार मन को हल्का करता है!!
मुसीबत सब पर आती है, कोई बिखर जाता है और कोई निखर जाता है!!
सबसे अधिक समझदार वह है
जो अपनी कमियो को जानकर उनका सुधार कर सकता हो l
Saturday, 23 April 2016
Motivational Poem
Motivational Quotes
हीथ में पैसा हो तो ताकत
महसूस होती है।
जबकि जेब खाली हो तो
सब कुछ बेमानी सा लगता है।
समृद्धि सुखदायी और दरिद्रता दुखदायी है।
सुविचार भी कहता है....
पैसा
आत्मशक्ति-आत्मविश्वास,
आशा-उत्साह भरता है,
जबकि
निर्धनता-दरिद्रता
लज्जा-ग्लानि, हीनता-निराशा
अमीरी ताकत देती है, जबकि
गरीबी कमजोरी।
बहुत अधिक तो नहीं, हाँ मगर, पर्याप्त धन तो जरूरी है ही।
अंत में सवाल भी है कि .
क्या आर्थिक संसाधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाते ही जा रहे हैं?
Sunday, 10 April 2016
Different Between India And Bharat
भारत में गॉंव है, गली है, चौबारा है.
इंडिया में सिटी है, मॉल है, पंचतारा है.
भारत में घर है, चबूतरा है, दालान है.
इंडिया में फ्लैट और मकान है.
भारत में काका है, बाबा है, दादा है, दादी है.
इंडिया में अंकल आंटी की आबादी है.
भारत में खजूर है, जामुन है, आम है.
इंडिया में मैगी, पिज्जा, माजा का नकली आम है.
भारत में मटके है, दोने है, पत्तल है.
इंडिया में पोलिथीन, वाटर व वाईन की बोटल है.
भारत में गाय है, गोबर है, कंडे है.
इंडिया में सेहतनाशी चिकन बिरयानी अंडे है.
भारत में दूध है, दही है, लस्सी है.
इंडिया में खतरनाक विस्की, कोक, पेप्सी है.
भारत में रसोई है, आँगन है, तुलसी है.
इंडिया में रूम है, कमोड की कुर्सी है.
भारत में कथडी है, खटिया है, खर्राटे हैं.
इंडिया में बेड है, डनलप है और करवटें है.
भारत में मंदिर है, मंडप है, पंडाल है.
इंडिया में पब है, डिस्को है, हॉल है.
भारत में गीत है, संगीत है, रिदम है.
इंडिया में डान्स है, पॉप है, आईटम है.
भारत में बुआ है, मौसी है, बहन है.
इंडिया में सब के सब कजन है.
भारत में पीपल है, बरगद है, नीम है.
इंडिया में वाल पर पूरे सीन है.
भारत में आदर है, प्रेम है, सत्कार है.
इंडिया में स्वार्थ, नफरत है, दुत्कार है.
भारत में हजारों भाषा हैं, बोली है.
इंडिया में एक अंग्रेजी एक बडबोली है.
भारत सीधा है, सहज है, सरल है.
इंडिया धूर्त है, चालाक है, कुटिल है.
भारत में संतोष है, सुख है, चैन है.
इंडिया बदहवास, दुखी, बेचैन है.
क्योंकि …
भारत को देवों ने रचाया है.
इंडिया को लालची, अंग्रेजों ने बसाया है.... """""।।। india हटाओ भारत लाओ।।।।।"《
Saturday, 9 April 2016
Excise Duty
क्या लोहा सोने से भी महंगा है ?
तो जब लोहे पर इक्साइज ड्यूटी है तो सोने पर क्यों नहीँ हो सकती ?
.... क्या स्वर्णकार देश के सबसे गरीब लोग हैं ...??
बिल्कुल नहीँ ! आम राय तो यही है कि यह वर्ग भारत के सबसे सम्पन्न वर्गों में आता है ।
तो फिर मात्र एक प्रतिशत के इक्साइज टैक्स पर इतना रोना धोना क्यों ? क्या धंधे में पारदर्शिता रखने की अपेक्षा उनसे नहीँ की जानी चाहिए ..?
ऐसा नहीँ है कि देश में पहली बार कोइ टैक्स लगा है । इससे पहले भी सेवा कर .... या अनेक प्रकार के सेस लगते रहे हैं ।
स्वर्णाभूषणों पर दस प्रतिशत से तीस प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज के नाम पर ले लेते है यह लोग ..... इस पर कोई भी स्पष्ट नियम नहीँ है ।
और सबसे बुरी बात तो यह है कि आज गहने खरीद कर कल वापस करने जांय तो तीस प्रतिशत तक बट्टा काट लिया जाता है ....!!
मुनाफाखोरी को समझें -
1.मान लीजिए आप एक लाख रुपये(₹100000) का गहना खरीदते हैँ । अब इसमें मेकिंग चार्ज पच्चीस प्रतिशत है । इसका अर्थ यह हुआ कि वास्तविक सोना पचहत्तर हजार(₹75000) का ही है , तथा बनाने का चार्ज पच्चीस हजार(₹25000) रुपये ।
अगले दिन जब आप वापस करने जाते हैं तो सोने की मूल कीमत पर बीस प्रतिशत का बट्टा(₹12000) काट लिया जाता है ।
और आपके हाथ बचते हैँ महज ₹5800 ।
इसका अर्थ यह हुआ कि सुनार ने आपकी खून-पसीने की कमाई के बयालिस हजार रुपये (₹42000) बैठे हडप लिया .. !
2. आभूषण खरीदते समय गहने में लगे सस्ते पत्थरों तथा सजावटी समाग्री को सोने की कीमत पर तौल कर दिया जाता है ..... किन्तु अगले ही दिन जब आप वापस करने जाऐंगे तो सुनार पत्थरों को काट कर अलग कर देगा तथा सिर्फ सोना ही तौल कर लेगा ... वह भी बट्टा काट कर ...!
3. अक्सर आपसे बताया जाता है कि सोना 22 कैरेट का है ... किन्तु वह होता है 20 या 18 कैरेट का !
4. आप पुराने आभूषण को जब पालिश करवाने के लिए ले जाते हैं ... तो एक्वेरेजिया नामक तेजाब से गहने को धो कर कुछ सोना ही निकाल लेते हैं ।
गहना तो चमक जाता है .... पर आपका सोना कम हो जाता है !
ऐसा नहीँ कि इमानदार सुनार हैं ही नही ..... किन्तु सत्य यह भी है कि उपरोक्त बेइमानी बडे स्तर पर हो रही है ।
और अंतिम बात ...
क्या सूनारों के हालात देश के किसानों से भी खराब हैं ?
आज सूखा ग्रस्त महाराष्ट्र का किसान महज_तीन_रुपये प्रति कीलो की दर से प्याज बेच कर टेंकर का पानी खरीद रहा है!
कितने पत्रकारों/मीडिया ने इस विषय पर ध्यान आकर्षित किया?
किसान को खाद या कीट नाशक दवाऐं किस दर पर मिल रहे है ... या फिर मिल ही नहीँ रहे हैं, इस विषय पर कितने पत्रकारों या मीडिया ने विश्लेषण किया है?
आज जबकि मोदी सरकार ने किसानों के हित में अनेक सुरक्षा योजना तथा बीमा की ब्यवस्था कर रही है तो , देश के प्रबुद्ध नागरिकों को स्वर्णाभूषणों पर इस एक प्रतिशत टैक्स को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए ।
NIT
(NIT में देशभक्त छात्रों पर हुए जुल्म पर मेरी यह नवनिर्मित मौलिक रचना....)
"अखंड भारत के मानचित्र मे भयानक ये पंचर देखा ,
भारत माता की जय पर लाठीचार्ज का मंजर देखा ।
खुद्दारी तक बेच रहे हैं कुछ हमारे खादी वाले ,
देशभक्तों पे लाठी भांज रहे देखो ये खाकी वाले ।
भारत का जयकारा करने वालों को जमकर के पीटा ,
दौड़ा दौड़ाकर मारा उन्हें पकड़ पकड़कर घसीटा ।
न जाने कैसी ये बिजली आफत की मेरे हिंद में चमकी है ,
देशभक्त लड़कियों को मिल रही रेप वाली धमकी है ।
JNU में बाहर रहे NIT में घुसे सिपाही कैसी ये गाथा है ,
पुलिस छिन ले गई तिरंगा तो झुक गया शर्म से माथा है ।
देश के टुकड़े कहने पर पुलिस बाहर इंतजार करती है ,
भारत माता की जय वालों को कैंपस में घुस मारती है ।
सरकार बनते ही ये कैसी भाषा का आगाज हुआ ,
डिप्टी सीएम कह रहे मामूली लाठी चार्ज हुआ ।
निर्मल सिंह भूल रहे पार्टी के इतिहास को ,
लाल चौक पर तिरंगे से मिली हुई संत्रास को ।
श्रीनगर के चौराहे पर गजब की हुंकार लगाई थी ,
भारत माता के जयकारे पर भाजपा ने लाठी खायी थी ।
उसी धरा पर पाकपरस्तों नें जमकर उत्पात मचाया है ,
शहीदों की कुर्बानी को कितना अधिक लजाया है ।
रो रही होगी आत्मा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की ,
खुश हो रही होगी आत्मा मुफ्ती सी खुदगर्जी की ।
भारत के जर्रे जर्रे में जरुरी फिर से अब ये नारा है ,
जहां बलिदान हुए मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है ।
राष्ट्र विरोधी बात करे वही सुविधा से जिंदा है यहां ,
पात पात भारतमाता हो रही अब तो शर्मिंदा यहां ।
कितना है अफसोस ये जो देश चाट रहे हैं ,
हम उन्हें सीने से लगाकर समझौते बांट रहे हैं:।
"मोदी जी" याद रखना अपने वतनपरस्त परिवेश को ,
महबूबा के चक्कर में भूलमत जाना अपने अखंड देश को ।
समय रहते खत्म कर दो रोज की इस तकरार को ,
वरना जनता माफ न करेगी जुमलों वाली सरकार को ।
उठो जवानों उठो दीवानों भारत मां की शुभ संतानों ,
देशद्रोह के उठे सर पर राष्ट्रवाद का सीना तानो ।
हाय हैलो टाटा बाय बाय नहीं राष्ट्रवाद वाला मुंह खोलो ,
आओ "मित्र" एक बार मेरे संग 'भारत माता की जय' बोलो|
Monday, 4 April 2016
New Generation
कपड़े हो गए छोटे
लाज कहा से आए
रोटी हो गई ब्रैड
ताकत कहा से आए
फूल हो गए प्लास्टिक के
खुशबू कहा से आए
चेहरा हो गया मेकअप का
रूप कहाँ से आए
शिक्षक हो गए टयुशन के
विद्या कहाँ से आए
भोजन हो गए होटल के
तंदरुस्ती कहाँ से आए
प्रोग्राम हो गए केबल के
संस्कार कहाँ से आए
आदमी हो गए पैसे के
दया कहाँ से आए
धंधे हो गए हायफाय
बरकत कहाँ से आए
भक्ति करने वाले स्वार्थी हो गए
भगवान कहाँ से आए
रिश्तेदार हो गये व्हाट्सऐप के
मिलने कहाँ से आए....
Saturday, 2 April 2016
वीर सावरकर - एक मिशाल
हमारे देश के क्रान्तिकारी केवल और केवल महान है परन्तु गद्दार कभी नहीं।
वीर सावरकर को एक कथित नेता ने गद्दार कहा हैं। भारत देश की विडंबना देखिये जिन महान क्रांतिकारियों ने अपना जीवन देश के लिए बलिदान कर दिया। उन क्रांतिकारियों के नाम पर जात-पात, प्रांतवाद, विचारधारा, राजनीतिक हित आदि के आधार पर विभाजन कर दिया गया। इस विभाजन का एक मुख्य कारण देश पर सत्ता करने वाला एक दल भी रहा। जिसने केवल गांधी-नेहरू को देश के लिए संघर्ष करने वाला प्रदर्शित किया। जबकि जो क्रान्तिकारी कांग्रेस की विचारधारा से अलग रहकर कार्य कर रहे थे उनके योगदान की चर्चा कम ही सुनने को मिलती है। इस कारण से यह भ्रान्ति पैदा हो गई हैं कि देश को स्वतंत्रता गांधी जी/कांग्रेस ने दिलाई थी? सत्य यह हैं कि इस नये विकृत इतिहास में स्वाधीनता के लिए प्राणोत्सर्ग करने वाले, सर्वस्व समर्पित करने वाले असंख्य क्रांतिकारियों, अमर हुतात्माओं की पूर्ण रूप से उपेक्षा की गई हैं।
हमारे विचार की पुष्टि हमारे महान क्रांतिकारी करते है। पेशावर कांड के मुख्य क्रांतिकारी चन्द्र सिंह गढ़वाली भेंट वार्ता में कहते है। इस आज़ादी का श्रेय कांग्रेस देना कोरा झूठ हैं। मैं पूछता हूँ की ग़दर पार्टी, अनुशीलन समिति, एम.एन.एच., रास बिहारी बोस, राजा महेंदर प्रताप, कामागाटागारू कांड, दिल्ली लाहौर के मामले, दक्शाई कोर्ट मार्शल के बलिदान क्या कांग्रेसियों ने दिए हैं, चोरा- चौरी कांड और नाविक विद्रोह क्या कांग्रेसियों ने दिए थे? लाहौर कांड, चटगांव शस्त्रागार कांड, मद्रास बम केस, ऊटी कांड, काकोरी कांड, दिल्ली असेम्बली बम कांड , क्या यह सब कांग्रेसियों ने किये थे? हमारे पेशावर कांड में क्या कहीं कांग्रेस की छाया थी? अत: कांग्रेस का यह कहना की स्वराज्य हमने लिया, एकदम गलत और झूठ हैं। कहते कहते क्षोभ और आक्रोश से चन्द्र सिंह जी उत्तेजित हो उठे थे। फिर बोले- कांग्रेस के इन नेताओं ने अंग्रेजों से एक गुप्त समझोता किया था। जिसके तहत भारत को ब्रिटेन की तरफ जो 18 अरब पौंड की पावती थी, उसे ब्रिटेन से वापिस लेने की बजाय ब्रिटिश फौजियों और नागरिकों के पेंशन के खातों में डाल दिया गया। साथ ही भारत को ब्रिटिश कुम्बे (commonwealth) में रखने को मंजूर किया गया और अगले 30 साल तक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद सेना को गैर क़ानूनी करार दे दिया गया। मैं तो हमेशा कहता हूँ- कहता रहूँगा की अंग्रेज वायसराय की ट्रेन उड़ाने की कोशिश कभी कांग्रेस ने नहीं की तो क्रांतिकारियों ने ही। हार्डिंग पर बम भी वही डाल सकते थे न की कांग्रेसी नेता। सहारनपुर-मेरठ- बनारस- गवालियर- पूना-पेशावर सब कांड क्रांतिकारियों से ही सम्बन्ध थे, कांग्रेस से कभी नहीं।
(सन्दर्भ- श्री शैलन्द्र जी का पांचजन्य के स्वदेशी अंक 16 अगस्त 1992 में लेख)
वीर सावरकर का यह चिंतन भी गढ़वाली जी की टिप्पणी को सिद्ध करता हैं जब उन्होंने कहा था की आज़ादी केवल अहिंसा से मिली हैं उन हज़ारों गुमनाम शहीदों का अपमान हैं जिन्होंने अत्याचारी अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष लिया एवं अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए। भारतीय स्वतंत्रता के लिये आरम्भ से ही समय-समय पर भारत के विभिन्न भागों में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र विप्लव होते रहे। भारतीय स्वतंत्रता के लिये आरम्भ से ही समय-समय पर भारत के विभिन्न भागों में अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र विप्लव होते रहे। इसकी पुष्टि इस सूची को देखकर पता चलती हैं।
1757 से अंग्रेजी राज द्वारा जारी लूट तथा भारतीय किसानों, मजदूरों, कारीगरों की बर्बादी, धार्मिक, सामाजिक भेदभाव ने जिस गति से जोर पकड़ा उसी गति से देश के विभिन्न हिस्सो मे विद्रोंह की चिंगारियाँ भी फूटने लगीं, जो 1857 में जंग-ए-आजादी के महासंग्राम के रूप में फूट पड़ी। 1757 के बाद शुरू हुआ सन्यासी विद्रोह (1763-1800), मिदनापुर विद्रोह (1766-1767), रगंपुर व जोरहट विद्रोह (1769-1799), चिटगाँव का चकमा आदिवासी विद्रोह (1776-1789), पहाड़िया सिरदार विद्रोह (1778), रंगपुर किसान विद्रोह (1783), रेशम कारिगर विद्रोह (1770-1800), वीरभूमि विद्रोह (1788-1789), मिदनापुर आदिवासी विद्रोह (1799), विजयानगरम विद्रोह (1794), केरल में कोट्टायम विद्रोह (1787-1800), त्रावणकोर का बेलूथम्बी विद्रोह (1808-1809), वैल्लोर सिपाही विद्रोह (1806), कारीगरों का विद्रोह (1795-1805), सिलहट विद्रोह (1787-1799), खासी विद्रोह (1788), भिवानी विद्रोह (1789), पलामू विद्रोह (1800-02), बुंदेलखण्ड में मुखियाओं का विद्रोह (1808-12), कटक पुरी विद्रोह (1817-18), खानदेश, धार व मालवा भील विद्रोह (1817-31,1846 व 1852), छोटा नागपुर, पलामू चाईबासा कोल विद्रोह (1820-37), बंगाल आर्मी बैरकपुर में पलाटून विद्रोह (1824), गूजर विद्रोह (1824), भिवानी हिसार व रोहतक विद्रोह (1824-26), काल्पी विद्रोह (1824), वहाबी आंदोलन (1830-61), 24 परगंना में तीतू मीर आंदोलन (1831), मैसूर में किसान विद्रोह (1830-31), विशाखापट्टनम का किसान विद्रोह (1830-33), मुंडा विद्रोह (1834), कोल विद्रोह (1831-32) संबलपुर का गौंड विद्रोह (1833), सूरत का नमक आंदोलन (1844), नागपुर विद्रोह (1848), नगा आंदोलन (1849-78), हजारा में सय्यद का विद्रोह (1853), गुजरात का भील विद्रोह (1809-28), संथाल विद्रोह (1855-56) तक सिलसिला जारी रहा। 1857 का संघर्ष संयुक्त भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। नील विद्रोह (सन् 1850 से 1860 तक),कूका विद्रोह (सन् 1872),वासुदेव बलवंत फड़के के मुक्ति प्रयास (सन् 1875 से 1879),चाफेकर संघ (सन् 1897 के आसपास),बंग-भंग आंदोलन (सन् 1905),यूरोप में भारतीय क्रांतिकारियों के मुक्ति प्रयास (सन् 1905 के आसपास),अमेरिका तथा कनाडा में गदर पार्टी (प्रथम विश्वयुद्ध के आगे-पीछे),रासबिहारी बोस की क्रांति चेष्टा, हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ’ (सन् 1915 के आसपास), दक्षिण-पूर्व एशिया में आजाद हिंद आंदोलन,नौसैनिक विद्रोह (सन् 1946) आदि अनेक संघर्षों में से कुछ संघर्ष हैं जिनमें कांग्रेस या गांधीजी का कोई योगदान नहीं हैं। इसलिए इस बात को स्वीकार करना चाहिए की देश को आज़ादी हमारे महान क्रांतिकारियों के कारण मिली हैं नाकि कांग्रेस के कारण मिली हैं।
महात्मा गांधी जी निश्चित रूप से महान थे मगर अन्य का सहयोग भी कोई कम नहीं था। ,उनके योगदान को भुला देना कृतघ्नता है। उन क्रांतिकारियों को सम्मान पूर्वक श्रद्धांजलि देने का सबसे कारगर प्रयास यही होगा की निष्पक्ष रूप से इतिहास के पुनर्लेखन द्वारा उनके त्याग और समर्पण को आज की युवा पीढ़ी को अवगत करवाना चाहिए।जिन शहीदों के प्रयत्नों व त्याग से हमें स्वतंत्रता मिली, उन्हें उचित सम्मान नहीं मिला। अनेकों को स्वतंत्रता के बाद भी गुमनामी का अपमानजनक जीवन जीना पड़ा। ये शब्द उन्हीं पर लागू होते हैं-
उनकी तुरबत पर नहीं है एक भी दीया,जिनके खूँ से जलते हैं ये चिरागे वतन।
जगमगा रहे हैं मकबरे उनके, बेचा करते थे जो शहीदों के कफन।।