क्या लोहा सोने से भी महंगा है ?
तो जब लोहे पर इक्साइज ड्यूटी है तो सोने पर क्यों नहीँ हो सकती ?
.... क्या स्वर्णकार देश के सबसे गरीब लोग हैं ...??
बिल्कुल नहीँ ! आम राय तो यही है कि यह वर्ग भारत के सबसे सम्पन्न वर्गों में आता है ।
तो फिर मात्र एक प्रतिशत के इक्साइज टैक्स पर इतना रोना धोना क्यों ? क्या धंधे में पारदर्शिता रखने की अपेक्षा उनसे नहीँ की जानी चाहिए ..?
ऐसा नहीँ है कि देश में पहली बार कोइ टैक्स लगा है । इससे पहले भी सेवा कर .... या अनेक प्रकार के सेस लगते रहे हैं ।
स्वर्णाभूषणों पर दस प्रतिशत से तीस प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज के नाम पर ले लेते है यह लोग ..... इस पर कोई भी स्पष्ट नियम नहीँ है ।
और सबसे बुरी बात तो यह है कि आज गहने खरीद कर कल वापस करने जांय तो तीस प्रतिशत तक बट्टा काट लिया जाता है ....!!
मुनाफाखोरी को समझें -
1.मान लीजिए आप एक लाख रुपये(₹100000) का गहना खरीदते हैँ । अब इसमें मेकिंग चार्ज पच्चीस प्रतिशत है । इसका अर्थ यह हुआ कि वास्तविक सोना पचहत्तर हजार(₹75000) का ही है , तथा बनाने का चार्ज पच्चीस हजार(₹25000) रुपये ।
अगले दिन जब आप वापस करने जाते हैं तो सोने की मूल कीमत पर बीस प्रतिशत का बट्टा(₹12000) काट लिया जाता है ।
और आपके हाथ बचते हैँ महज ₹5800 ।
इसका अर्थ यह हुआ कि सुनार ने आपकी खून-पसीने की कमाई के बयालिस हजार रुपये (₹42000) बैठे हडप लिया .. !
2. आभूषण खरीदते समय गहने में लगे सस्ते पत्थरों तथा सजावटी समाग्री को सोने की कीमत पर तौल कर दिया जाता है ..... किन्तु अगले ही दिन जब आप वापस करने जाऐंगे तो सुनार पत्थरों को काट कर अलग कर देगा तथा सिर्फ सोना ही तौल कर लेगा ... वह भी बट्टा काट कर ...!
3. अक्सर आपसे बताया जाता है कि सोना 22 कैरेट का है ... किन्तु वह होता है 20 या 18 कैरेट का !
4. आप पुराने आभूषण को जब पालिश करवाने के लिए ले जाते हैं ... तो एक्वेरेजिया नामक तेजाब से गहने को धो कर कुछ सोना ही निकाल लेते हैं ।
गहना तो चमक जाता है .... पर आपका सोना कम हो जाता है !
ऐसा नहीँ कि इमानदार सुनार हैं ही नही ..... किन्तु सत्य यह भी है कि उपरोक्त बेइमानी बडे स्तर पर हो रही है ।
और अंतिम बात ...
क्या सूनारों के हालात देश के किसानों से भी खराब हैं ?
आज सूखा ग्रस्त महाराष्ट्र का किसान महज_तीन_रुपये प्रति कीलो की दर से प्याज बेच कर टेंकर का पानी खरीद रहा है!
कितने पत्रकारों/मीडिया ने इस विषय पर ध्यान आकर्षित किया?
किसान को खाद या कीट नाशक दवाऐं किस दर पर मिल रहे है ... या फिर मिल ही नहीँ रहे हैं, इस विषय पर कितने पत्रकारों या मीडिया ने विश्लेषण किया है?
आज जबकि मोदी सरकार ने किसानों के हित में अनेक सुरक्षा योजना तथा बीमा की ब्यवस्था कर रही है तो , देश के प्रबुद्ध नागरिकों को स्वर्णाभूषणों पर इस एक प्रतिशत टैक्स को सहर्ष स्वीकार करना चाहिए ।
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