(NIT में देशभक्त छात्रों पर हुए जुल्म पर मेरी यह नवनिर्मित मौलिक रचना....)
"अखंड भारत के मानचित्र मे भयानक ये पंचर देखा ,
भारत माता की जय पर लाठीचार्ज का मंजर देखा ।
खुद्दारी तक बेच रहे हैं कुछ हमारे खादी वाले ,
देशभक्तों पे लाठी भांज रहे देखो ये खाकी वाले ।
भारत का जयकारा करने वालों को जमकर के पीटा ,
दौड़ा दौड़ाकर मारा उन्हें पकड़ पकड़कर घसीटा ।
न जाने कैसी ये बिजली आफत की मेरे हिंद में चमकी है ,
देशभक्त लड़कियों को मिल रही रेप वाली धमकी है ।
JNU में बाहर रहे NIT में घुसे सिपाही कैसी ये गाथा है ,
पुलिस छिन ले गई तिरंगा तो झुक गया शर्म से माथा है ।
देश के टुकड़े कहने पर पुलिस बाहर इंतजार करती है ,
भारत माता की जय वालों को कैंपस में घुस मारती है ।
सरकार बनते ही ये कैसी भाषा का आगाज हुआ ,
डिप्टी सीएम कह रहे मामूली लाठी चार्ज हुआ ।
निर्मल सिंह भूल रहे पार्टी के इतिहास को ,
लाल चौक पर तिरंगे से मिली हुई संत्रास को ।
श्रीनगर के चौराहे पर गजब की हुंकार लगाई थी ,
भारत माता के जयकारे पर भाजपा ने लाठी खायी थी ।
उसी धरा पर पाकपरस्तों नें जमकर उत्पात मचाया है ,
शहीदों की कुर्बानी को कितना अधिक लजाया है ।
रो रही होगी आत्मा श्यामा प्रसाद मुखर्जी की ,
खुश हो रही होगी आत्मा मुफ्ती सी खुदगर्जी की ।
भारत के जर्रे जर्रे में जरुरी फिर से अब ये नारा है ,
जहां बलिदान हुए मुखर्जी वो कश्मीर हमारा है ।
राष्ट्र विरोधी बात करे वही सुविधा से जिंदा है यहां ,
पात पात भारतमाता हो रही अब तो शर्मिंदा यहां ।
कितना है अफसोस ये जो देश चाट रहे हैं ,
हम उन्हें सीने से लगाकर समझौते बांट रहे हैं:।
"मोदी जी" याद रखना अपने वतनपरस्त परिवेश को ,
महबूबा के चक्कर में भूलमत जाना अपने अखंड देश को ।
समय रहते खत्म कर दो रोज की इस तकरार को ,
वरना जनता माफ न करेगी जुमलों वाली सरकार को ।
उठो जवानों उठो दीवानों भारत मां की शुभ संतानों ,
देशद्रोह के उठे सर पर राष्ट्रवाद का सीना तानो ।
हाय हैलो टाटा बाय बाय नहीं राष्ट्रवाद वाला मुंह खोलो ,
आओ "मित्र" एक बार मेरे संग 'भारत माता की जय' बोलो|
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