हीथ में पैसा हो तो ताकत
महसूस होती है।
जबकि जेब खाली हो तो
सब कुछ बेमानी सा लगता है।
समृद्धि सुखदायी और दरिद्रता दुखदायी है।
सुविचार भी कहता है....
पैसा
आत्मशक्ति-आत्मविश्वास,
आशा-उत्साह भरता है,
जबकि
निर्धनता-दरिद्रता
लज्जा-ग्लानि, हीनता-निराशा
अमीरी ताकत देती है, जबकि
गरीबी कमजोरी।
बहुत अधिक तो नहीं, हाँ मगर, पर्याप्त धन तो जरूरी है ही।
अंत में सवाल भी है कि .
क्या आर्थिक संसाधन आपके आत्मविश्वास को बढ़ाते ही जा रहे हैं?
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