Friday, 25 March 2016

संगठन मे शक्ति है|

मैं पटेल हूँ, मै गुर्जर हूँ,
मै जाट हूँ, मै यादव हूँ,
मै राजपुत हूँ, मै पण्डित हूँ
मै मराठा हूँ, मै दलित हुँ...
मै सिख हुँ
लड़ते रहिये शानों से,।
फिर से तुम जूते खाओगे, गजनी की संतानो से ।
शर्म करो, हिन्दू बनते हो, नस्लें तुम पर थूंकेंगी,
बंटे हुए हो जाति पंथ में, ये ज्वालायें फूकेंगी ।
ऐसे ही भारतीय समाज के कतरे कतरे कर डालो,।
संविधान को छलनी कर के, गोबर इसमें भर डालो ।
जाति जाति करते इक दिन, तुम लावारिस हो जाओगे,।
बंटने पर ही अड़े रहे तो, फिर गुलाम हो जाओगे ।।
किसका इंतजार हे मूर्खो अब कोई भगत या आजाद नही आएगा ।
लिप्त रहे जात-पात में ऐसे तो,
एकदिन भारत समाप्त हो जाएगा ।।

No comments:

Post a Comment