इस संसार में जितने भी झंझट हुए हैं, उनके मूल में गरीबी ही प्रमुख कारण रही है।
यही क्रांतिकारी, पापी और अपराधी पैदा करती है।
यह ऐसी बीमारी है जो अच्छे-भले को गंदा-बुरा बना देती है।
इसलिए सुविचार बना....
बहुधा गरीबी...
क्रांति, पाप, अपराध
की जननी है
गरीबी के कारण भी आदमी, कभी चोरी-डकैती आदि का सहारा लेकर
पापी पेट को भरता है।
गरीब क्या जी पाएगा, क्या बढ़ पाएगा, क्या सुखी हो पाएगा?
अंत में सवाल भी है कि
क्या आप, पैसा न होने पर भी अपने व्यवहार और चरित्र को
बिगडऩे-गिरने-उजडऩे से रोक सकते है?
जय आर्यावर्त्त
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